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कविता : कोरोना की भयावहता

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🖊️

 "कोरोना की भयावहता"

क्षति बतलाने को

मौतों का आंकड़ा गिना रहे

मगर यह बात, तो सिर्फ वही जानता

जो अपनो की लाशों का बोझ उठा रहा

कहीं दर्द बताने को कोई रहा नहीं

कोई दर्द लिए है घूम रहा

कुछ तो है इतने डरे-डरे

कि दर्द बांटने को तैयार नहीं

मीडिया अपने आंकड़े सुना रही

सरकार अपने आंकड़े बता रही

क्या है क्षति? कितनी है क्षति?

कोई जानता ही नहीं ।

                             - 🖊️ अर्पित सचान 



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