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कविता : मेरी याद

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"मेरी याद"

वो जो मेरी यादों में बसी है।

ऐसा लगता है यही कहीं है।।

दिखाई तो पड़ती है अक्सर मुझे।

मगर लगता है ख्वाब तो नही है।।

फिजाओं मे उसकी महक सी है।

उसकी खुशबू हवाओं में घुली है।।

पता नहीं कहीं गायब सी है ।।

                                           - अर्पित सचान



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